नगर निगम बोर्ड बैठक में अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर पार्षदों ने किया हंगामा।

ऋषिकेश नगर निगम बोर्ड बैठक में पार्षदों ने विकास कार्यों के ना होने पर निगम के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की और हंगामा किया। बुधवार को निगम के स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित निगम की बैठक महापौर

ऋषिकेश

नगर निगम बोर्ड बैठक में पार्षदों ने विकास कार्यों के ना होने पर निगम के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की और हंगामा किया।
बुधवार को निगम के स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित निगम की बैठक महापौर अनीता ममगांई की अध्यक्षता और निगम के मुख्य आयुक्त राहुल कुमार गोयल के संचालन में बैठक के दौरान निगम के पार्षद राकेश सिंह ने बैठक शुरू होते ही पार्षदों द्वारा पारित किए गए निगम क्षेत्र में विकास कार्यों के ना होने का कारण जब अधिकारियों से पूछा तो अधिकारियों ने बजट की कमी बताई।इस पर पार्षदों ने जमकर हंगामा शुरू किया और कहा कि अधिकारियों की वजह से पार्षदों की छवि जनता के बीच खराब हो रही है।
बोर्ड की बैठक के दौरान नगर निगम पार्षद राकेश मिया और मनीष शर्मा ने ट्रिपल इंजन की सरकार होने पर भी केंद्र और राज्य की सरकार द्वारा निगम को बजट न मिलने पर महापौर और नगर आयुक्त को घेरा, उन्होंने कहा कि नगर पालिका से बनी नगर निगम ऋषिकेश में ग्रामीण क्षेत्र जुड़ने के बावजूद भी निगम का बजट न बढ़ पाना ट्रिपल सरकार की नाकामी है। पार्षद देवेंद्र प्रजापति ने बजट के अभाव में विकास कार्य ना होने का बहाना करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने की मांग करते हुए कहा कि निगम के अधिकारियों द्वारा शहर से होने वाली राजस्व कर की वसूली पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यहां तक की त्रिवेणी घाट पर बनी दुकानों  से भी‌ राजस्व नहीं वसूला जा रहा है ।
निगम पार्षद शिव कुमार गौतम ने कहा कि एन एच ओर पीडब्लूडी की सड़कों पर कार्य ना कर के वार्ड के विकाश कार्य करने पर जोर दिया जाना चाहिए। निगम को विकास के लिए बजट उपलब्ध नहीं होने के लिए अधिकारियोंं की नैतिक जिम्मेदारी बनती है।

नगर निगम पार्षद विकास तेवतिया ने निगम के अधिकारी और कर्मचारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में होने वाली वित समिति के द्वारा बजट को बढ़ाने के संबंध में निगम से मांगे गए 5 बिंदु पर रिपोर्ट मांगी थी जो कि निगम द्वारा अभी तक इन बिंदुओं पर कोई भी रिपोर्ट नहीं दी गई जिससे निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली के कारण निगम का बजट प्रभावित हो रहा है।

नगर निगम आयुक्त ने बताया कि शासन द्वारा जितने भी पार्षद नमित किए गए थे उनको शासन द्वारा निरस्त कर दिया गया है। इसलिए पूर्व की सरकार द्वारा नामित किए गए सभी पार्षदों को बैठक की कोई सूचना नहीं दी गई थी। जिसको लेकर नामित पार्षदों और क्षेत्र से चुने गए पार्षद के बीच आपस में गहमागहमी हो गई।
नगर निगम आयुक्त ने बताया कि 15वें वित्त आयोग के द्वारा विकास संबंधी विभिन्न वार्डो में में 5 साल में बजट में 15 परसेंट की बढ़ोतरी होती है। नगर निगम में बजट ना बढ़ने को लेकर पिछले दो वर्ष से कोविड के कारण लगातार टैक्स कलेक्शन का ना हो पाना भी बताया, साथ ही सभी वार्डों से कूड़े के डोर टू डोर कलेक्शन का भी लगातार ना मिलना आय ना बढ़ने का कारण है। बैठक के दौरान नगर निगम के अधिकारी, कर्मचारी  और पार्षद गण उपस्थित थे।

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