चमोली: कोटी गांव में जन्मा चार सींग वाला खाडू, नंदा राजजात यात्रा से जुड़ी परंपरा में उत्साह

चमोली: कोटी गांव में जन्मा चार सींग वाला खाडू, नंदा राजजात यात्रा से जुड़ी परंपरा में उत्साह

चमोली: चमोली जनपद के कर्णप्रयाग विकासखंड के कोटी गांव में चार सींग वाले चौसिंगा (खाडू) अर्थात मेढा ने जन्म लिया है, क्षेत्रवासियों के लिए यह जहां एक बड़ा चमत्कार हैं वहीं इसको लेकर भारी उत्साह भी देखने को मिल रहा है। प्रत्येक 12 वर्ष बाद यह

चमोली: चमोली जनपद के कर्णप्रयाग विकासखंड के कोटी गांव में चार सींग वाले चौसिंगा (खाडू) अर्थात मेढा ने जन्म लिया है, क्षेत्रवासियों के लिए यह जहां एक बड़ा चमत्कार हैं वहीं इसको लेकर भारी उत्साह भी देखने को मिल रहा है। प्रत्येक 12 वर्ष बाद यह 280 किलोमीटर की धार्मिक पदयात्रा निकाली जाती है जो की मां नंदा देवी के मायके से ससुराल विदाई का प्रतीक है जिससे कुछ समय पहले ही यह खाडू जन्म लेता है। 12 वर्ष में होने वाली नंदा राजजात यात्रा से जुड़ी परंपरा है कि चार सींग वाला खाडू यात्रा की अगुवाई करता है। इसका जन्म यात्रा से एक साल पहले हो जाता है। इस बाद भी 2026 में होने वाली यात्रा से पहले खाडू दिखा है।

कोटी गांव में चार सींग वाला मेंंढा (खाडू) मिला है। उसका जन्म करीब पांच माह पहले हुआ है। चार सींग का मेंंढा श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा की अगुवाई करता है। जिससे सोशल मीडिया में इसे अगुवा बताया जा रहा है। हालांकि समिति ने कहा कि जिसे देवी चयन करेगी वही बनेगा अगुवा।

कोटी क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व ज्येष्ठ उपप्रमुख गौतम मिंगवाल ने बताया कि कोटी गांव के हरीश लाल के यहां एक चार सींग वाला मेंंढा है। जो करीब पांच माह का है। ऐसे में लोग इसे श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा से जोड़कर देख रहे हैं। कोटी में मां नंदा का मंदिर है और यह गांव हिमालीय महाकुंभ श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा का पांचवां पड़ाव भी है।

बकरीपालक और उनके बेटे गौरव का कहना है कि वो 20 वर्षों से बकरी और भेड़ पालन कर रहे हैं लेकिन आज तक चार सींग का खाडू पैदा नहीं हआ। अब हुआ है जिसका पता उन्हें दो सप्ताह पहले ही लगा है कि उसके चार सींग आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि समिति चाहे तो वो देवी यात्रा के लिए मेंंढा को नि:शुल्क प्रदान करेंगे।

वहीं श्रीनंदा देवी राजजात समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुंवर का कहना है कि देवी यात्रा में मेंंढा का ही नहीं बल्कि हर सामग्री का चयन परंपरा और शास्त्र सम्मत होने पर किया जाता है। अभी देवी यात्रा के लिए केवल एक अनुष्ठान मौडवी ही हो पाया है।

आगामी बसंत पंचमी पर यात्रा का कार्यक्रम जारी होने और मनौती होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि चार सींग वाले मेंंढों का जन्म यदा-कदा होता रहता है। इसमें वही मेंंढा लिया जाएगा जिसे देवी चयनित करेगी और जो परंपरा और शास्त्र सम्मत होगा।

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