नैनीताल। जिला पंचायत अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष चुनाव के दौरान हुई हिंसा और फायरिंग की घटनाओं पर नैनीताल हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस प्रशासन को जमकर फटकार लगाई। सोमवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने नैनीताल के एसएसपी पी.एस. मीणा पर गंभीर टिप्पणी करते
नैनीताल।
जिला पंचायत अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष चुनाव के दौरान हुई हिंसा और फायरिंग की घटनाओं पर नैनीताल हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस प्रशासन को जमकर फटकार लगाई। सोमवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने नैनीताल के एसएसपी पी.एस. मीणा पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि “हम एसएसपी पर अब विश्वास खो चुके हैं।” कोर्ट ने सरकार को उनके तत्काल ट्रांसफर के आदेश दिए।
कोर्ट ने तल्ख लहजे में पूछा कि हथियारबंद हिस्ट्रीशीटर खुलेआम मतदान स्थल के आसपास कैसे घूम रहे थे और पुलिस हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठी रही। इस पर एडवोकेट जनरल ने स्वीकार किया कि पुलिस से चूक हुई है और एसएसपी को एक मौका देने की अपील की, लेकिन कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
सुनवाई के दौरान पांचों जिला पंचायत सदस्यों, जिन्हें मतदान के दिन बलपूर्वक उठाए जाने की बात कही गई थी, को हाईकोर्ट में पेश किया गया। हालांकि कोर्ट ने उनकी दलीलें सुनने से साफ मना कर दिया और कहा कि इनसे कोर्ट को गुमराह किया गया है।
जिलाधिकारी वंदना ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट को बताया कि 15 अगस्त की सुबह 3 बजे मतगणना नियमानुसार कराई गई थी और मतपत्रों को ट्रेजरी के लॉकर में सुरक्षित रखा गया था। आज इन्हें कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत भी किया गया। कोर्ट ने जिलाधिकारी और एसएसपी दोनों से विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद के लिए पुनर्मतदान पर हाईकोर्ट का फैसला भी आने की संभावना है।









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