देहरादून। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा अर्बन कोऑपरेटिव बैंक पर छह माह के लिए कड़े प्रतिबंध लगाए जाने के बाद करीब नौ हजार खाताधारकों के लगभग 90 करोड़ रुपये फंस गए हैं। इस फैसले से नाराज जमाकर्ताओं ने बैंक मुख्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और
देहरादून।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा अर्बन कोऑपरेटिव बैंक पर छह माह के लिए कड़े प्रतिबंध लगाए जाने के बाद करीब नौ हजार खाताधारकों के लगभग 90 करोड़ रुपये फंस गए हैं। इस फैसले से नाराज जमाकर्ताओं ने बैंक मुख्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और चेयरमैन का घंटों घेराव किया।
दर्शनलाल चौक स्थित बैंक मुख्यालय में दोपहर बाद बड़ी संख्या में खाताधारक और जमाकर्ता एकत्र हुए। उन्होंने बैंक प्रबंधन पर वित्तीय अनियमितताओं को छिपाने का आरोप लगाते हुए कड़े सवाल उठाए। जमाकर्ताओं का कहना था कि जब बैंक में गड़बड़ियां सामने आ रही थीं, तब निदेशक मंडल खामोश क्यों रहा। यदि अधिकारी वित्तीय अनियमितताओं में शामिल थे तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई और खाताधारकों को इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई।
प्रदर्शन के दौरान चेयरमैन मयंक ममंगाई ने रक्षात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि यह मामला उनके कार्यकाल से पूर्व का है और उनका व्यक्तिगत रूप से इससे कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे खाताधारकों के साथ हैं और उनकी जमा राशि सुरक्षित दिलाने के लिए शासन, RBI व अन्य एजेंसियों से मिलेंगे। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की भी मांग की।
हंगामे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को शांत कराया। चौकी प्रभारी ने कहा कि कानून अपना काम करेगा और खाताधारकों के हितों की रक्षा की जाएगी। अंततः 21 फरवरी को निदेशक मंडल और जमाकर्ताओं के बीच बैठक कराने पर सहमति बनी।
RBI अधिकारियों पर भी आरोप
इसी मामले को लेकर नगर निगम कांट्रेक्टर एसोसिएशन और जमाकर्ताओं ने प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता कर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि वर्ष 2013-14 से घोटाले का सिलसिला जारी था और जब राशि 38 करोड़ तक पहुंच गई, तब दिखावे के लिए कार्रवाई की गई। उन्होंने RBI अधिकारियों और बैंक प्रबंधन पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
जमाकर्ताओं ने प्रदेश सरकार से बैंक में जिम्मेदार प्रशासक नियुक्त करने, एनपीए खातों से शीघ्र वसूली करने और स्वतंत्र जांच टीम गठित करने की मांग की। उनका आरोप है कि बैंक का ऑडिट नियमित रूप से होने के बावजूद भारी मुनाफा दिखाया जाता रहा, जबकि अंदरखाने वित्तीय गड़बड़ियां चलती रहीं। हर वर्ष चार्टर्ड अकाउंटेंट बदलने को भी उन्होंने संदेहास्पद बताया।
क्या है पूरा मामला?
RBI ने वित्तीय अनियमितताओं और खाताधारकों के हितों को ध्यान में रखते हुए अर्बन कोऑपरेटिव बैंक पर छह माह के लिए सख्त प्रतिबंध लगा दिए हैं। इन प्रतिबंधों के चलते बैंक के लेन-देन पर रोक लग गई है और खाताधारकों की राशि फिलहाल फ्रीज कर दी गई है। इससे हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति पर संकट खड़ा हो गया है।
जमाकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी एजेंसियां सक्रिय होतीं, तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। अब सभी की नजर 21 फरवरी को होने वाली बैठक और संभावित जांच कार्रवाई पर टिकी है।











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