रोते हुए बोले विधायक सुमित हृदयेश—‘मेरी जान को खतरा’, फोन टैपिंग और फर्जी रिकॉर्डिंग का लगाया आरोप

रोते हुए बोले विधायक सुमित हृदयेश—‘मेरी जान को खतरा’, फोन टैपिंग और फर्जी रिकॉर्डिंग का लगाया आरोप

हल्द्वानी: उत्तराखंड के हल्द्वानी से कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। मीडिया के सामने भावुक हुए विधायक ने आरोप लगाया कि प्रदेश में एक गिरोह सक्रिय है, जो नेताओं के फोन टैप कर रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि उनके और उनके परिवार के

हल्द्वानी: उत्तराखंड के हल्द्वानी से कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। मीडिया के सामने भावुक हुए विधायक ने आरोप लगाया कि प्रदेश में एक गिरोह सक्रिय है, जो नेताओं के फोन टैप कर रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि उनके और उनके परिवार के सदस्यों के फोन की भी निगरानी की जा रही है। साथ ही उन्होंने अपनी जान को खतरा बताते हुए सरकार से न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

परिवार को नुकसान पहुंचाने की जताई आशंका

सुमित हृदयेश ने कहा कि उन्हें आशंका है कि उन्हें और उनके बच्चों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट कराकर उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। विधायक ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए फर्जी कॉल रिकॉर्डिंग और वीडियो तैयार कर वायरल किए जाने की भी आशंका है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री और एसएसपी से शिकायत का दावा

विधायक ने दावा किया कि उन्होंने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी शिकायत रखी थी। इसके अलावा, उनके अनुसार अप्रैल 2025 में एसएसपी को भी लिखित शिकायत दी गई थी। उन्होंने कथित गिरोह में निजी कंपनियों और कुछ प्रभावशाली लोगों के शामिल होने की आशंका जताई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

गैरसैंण विधानसभा सत्र में आत्मदाह की चेतावनी

अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर करते हुए सुमित हृदयेश ने गैरसैंण में प्रस्तावित विधानसभा सत्र के दौरान आत्मदाह करने तक की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय चाहिए और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

विधायक के इन आरोपों और चेतावनी के बाद प्रदेश की राजनीति में मामला गरमाने की संभावना है। अब इस मामले में संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया और शिकायतों पर होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल, फोन टैपिंग, कथित गिरोह की भूमिका और सुरक्षा संबंधी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

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