मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में मार्च के बजट सत्र के बाद अक्टूबर में भी भराड़ीसैंण में शुरू हुआ विधानसभा सत्र देहरादून/गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में मंगलवार को भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में विधानसभा सत्र शुरू होने
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में मार्च के बजट सत्र के बाद अक्टूबर में भी भराड़ीसैंण में शुरू हुआ विधानसभा सत्र
देहरादून/गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में मंगलवार को भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में विधानसभा सत्र शुरू होने के साथ ही पहली बार एक ही वर्ष में यहां दो विधानसभा सत्र आयोजित हो रहे हैं। इससे पहले इसी वर्ष मार्च में भराड़ीसैंण में बजट सत्र आयोजित किया गया था। अक्टूबर में दोबारा सत्र के आयोजन को गैरसैंण की विधायी गतिविधियों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। इसके बाद से यहां समय-समय पर विधानसभा की कार्यवाही संचालित होती रही है। हालांकि, अलग-अलग वर्षों में सत्रों की अवधि और आयोजन में अंतर रहा है। कुछ वर्षों में यहां विधानसभा का कोई सत्र आयोजित नहीं हुआ, जबकि कुछ वर्षों में एक बार सत्र आयोजित किया गया।
वर्ष 2014 में गैरसैंण में पहली बार तीन दिवसीय विधानसभा सत्र आयोजित हुआ था। वर्ष 2015 और 2016 में दो-दो दिन तथा वर्ष 2017 में दो दिवसीय सत्र चला। वर्ष 2018 में विधानसभा की कार्यवाही छह दिन तक संचालित हुई, जबकि वर्ष 2019 में यहां कोई सत्र आयोजित नहीं हुआ। वर्ष 2020 में पांच दिवसीय सत्र हुआ। इसके बाद वर्ष 2021 में एक से छह मार्च तक भराड़ीसैंण में छह दिवसीय बजट सत्र आयोजित किया गया।
वर्ष 2022 में गैरसैंण में विधानसभा सत्र नहीं हुआ। वर्ष 2023 में चार दिन और वर्ष 2024 में तीन दिवसीय सत्र आयोजित किया गया। वर्ष 2025 में यहां बजट सत्र और मानसून सत्र आयोजित हुए। वहीं, वर्ष 2026 में मार्च के बजट सत्र के बाद अक्टूबर में दूसरी बार विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से एक वर्ष में दो सत्र आयोजित करने का नया रिकॉर्ड बना है।
पर्वतीय क्षेत्रों के मुद्दों को प्राथमिकता देने पर जोर
गैरसैंण में विधानसभा सत्रों का आयोजन केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं, विकास की जरूरतों और स्थानीय जनभावनाओं को प्राथमिकता देने के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। भराड़ीसैंण में विधानसभा की कार्यवाही संचालित होने से राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी की भूमिका को मजबूती मिलती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि गैरसैंण उत्तराखंड की जनभावनाओं और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। सरकार का प्रयास है कि ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्रों के आयोजन के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं, जनअपेक्षाओं और विकास से जुड़े विषयों को प्राथमिकता मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गैरसैंण की भूमिका को सशक्त बनाना और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास को गति देना सरकार की प्रतिबद्धता है। राज्य सरकार जनभावनाओं के अनुरूप विकास और सुशासन के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है।
एक ही वर्ष में दो बार गैरसैंण में विधानसभा सत्र का आयोजन ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में इसकी भूमिका को विस्तार देने की दिशा में अहम कदम है। इससे पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को राज्य की विधायी प्रक्रिया में प्रमुखता मिलने की उम्मीद भी बढ़ी है।
















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