सारा की बैठक में कुल 2468.55 लाख रु की कार्य योजनाओं की स्वीकृति प्रदान की गई जनपदों को “वन डिस्ट्रिक्ट, वन रिवर” के सिद्धांत पर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश SARRA से जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं के साथ स्थायी अनुबंध (Permanent MoUs) करने के भी निर्देश
- सारा की बैठक में कुल 2468.55 लाख रु की कार्य योजनाओं की स्वीकृति प्रदान की गई
- जनपदों को “वन डिस्ट्रिक्ट, वन रिवर” के सिद्धांत पर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश
- SARRA से जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं के साथ स्थायी अनुबंध (Permanent MoUs) करने के भी निर्देश
- जल स्रोतों व जल निकायों के पुनर्जीवन से जुड़े सभी विभागों को समन्वित रूप से कार्य करने पर बल
- पारंपरिक धारों व नौलों की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करते हुए उनका पुनर्जीवीकरण (Revitalization) होगा
सचिवालय के वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में आज सचिव जलागम एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA) श्री दिलीप जावलकर की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति (SLEC) की बैठक आयोजित हुई।
बैठक में राज्यभर से जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन से संबंधित कार्यों की समीक्षा की गई तथा आठ नई कार्य योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई, जिनकी कुल लागत ₹2468.55 लाख रु है। इनमें से ₹1861.16 लाख रु की धनराशि SARRA द्वारा आवंटित की जाएगी। सचिव ने सभी जनपदों को “वन डिस्ट्रिक्ट, वन रिवर” की अवधारणा पर आधारित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि प्रत्येक जनपद अपनी एक प्रमुख या संकटग्रस्त नदी की पहचान कर उसके कैचमेंट एरिया में जल स्रोतों के पुनर्जीवन और संचयन कार्यों को प्रभावी रूप से लागू कर सके। उन्होंने कहा कि जनपदीय स्तर पर SARRA समितियों की बैठकें कर प्रस्तावों को आगामी राज्य स्तरीय बैठक में प्रस्तुत करें। साथ ही उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि जल संरक्षण कार्यों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा ग्राम पंचायत स्तर पर धारा-नौला संरक्षण समितियों का शीघ्र गठन किया जाए, जो स्थानीय स्तर पर निगरानी का कार्य करेंगी। इन समितियों को SARRA द्वारा वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने पारंपरिक धारों और नौलों की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए उनके पुनर्जीवीकरण पर विशेष बल दिया और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के लिए पैराहाइड्रोलॉजिस्टों की तैनाती करने के निर्देश दिए। श्री जावलकर ने सभी कार्य क्षेत्रों में जल संरक्षण हेतु ईको-फ्रेंडली संरचनाएँ विकसित करने पर जोर दिया तथा संबंधित विभागों, शैक्षणिक और तकनीकी संस्थानों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय जनता को क्षमता विकास एवं कार्यशालाओं से जोड़ने की बात कही, ताकि जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण को जन-आंदोलन का रूप दिया जा सके। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि विभिन्न कार्य योजनाओं के अंतर्गत निर्मित RCC चेक डैमों की वर्षा काल के बाद स्थिति का मूल्यांकन किया जाए।
बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती कहकशां नसीम ने एक करोड़ से अधिक लागत की आठ कार्य योजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया, जिनमें पौड़ी की तीन, नैनीताल की दो, चंपावत की एक और पिथौरागढ़ की दो योजनाएं शामिल हैं।











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