10 हजार की रिश्वत लेते पीडब्ल्यूडी अमीन रंगे हाथ गिरफ्तार

10 हजार की रिश्वत लेते पीडब्ल्यूडी अमीन रंगे हाथ गिरफ्तार

देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार पर एक बार फिर करारा प्रहार हुआ है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के अमीन टीका राम नौटियाल, तैनाती प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग, भटवाड़ी कैंप कार्यालय, उत्तरकाशी में, को ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार

देहरादून:

उत्तराखंड में सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार पर एक बार फिर करारा प्रहार हुआ है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के अमीन टीका राम नौटियाल, तैनाती प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग, भटवाड़ी कैंप कार्यालय, उत्तरकाशी में, को ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है।

जानकारी के अनुसार, आरोपी अमीन ने सड़क निर्माण के दौरान कटान से प्रभावित भूमि के मुआवज़े की फाइल आगे बढ़ाने के एवज में शिकायतकर्ता से रिश्वत की मांग की थी। शिकायत की पुष्टि के बाद सतर्कता अधिष्ठान की टीम ने जाल बिछाया और दिनांक 22 जनवरी 2026 को उसे रिश्वत की रकम लेते हुए मौके पर ही दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।

मुआवज़े के नाम पर वसूली का खेल
सड़क, पुल और अन्य विकास कार्यों में भूमि अधिग्रहण या कटान के बाद मिलने वाला मुआवज़ा पहले ही आम लोगों के लिए एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है। ऐसे में जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी और कर्मचारी यदि उसी प्रक्रिया को कमाई का जरिया बना लें, तो यह सीधे-सीधे जनता के अधिकारों पर डाका है।

भ्रष्टाचार की कड़ी में यह कोई पहला मामला नहीं
टीका राम नौटियाल की गिरफ्तारी अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि हाल के दिनों में सामने आए उन कई मामलों की अगली कड़ी है, जिनमें सरकारी अधिकारी रिश्वत लेते पकड़े गए हैं। इससे पहले हाल में 16 जनवरी 2026: हरिद्वार में जिला पूर्ति अधिकारी और उनके पीए को ₹50,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।

राज्य के विभिन्न जिलों में बीते महीनों के दौरान राजस्व, पुलिस, पूर्ति और निर्माण विभाग से जुड़े कई अधिकारी सतर्कता के शिकंजे में आ चुके हैं। मुआवज़ा, लाइसेंस, राशन, शस्त्र लाइसेंस और निर्माण कार्य—लगभग हर विभाग में शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

बड़ा सवाल: कब बदलेगा सिस्टम?
लगातार हो रही गिरफ्तारियां यह साबित करती हैं कि सतर्कता एजेंसियां सक्रिय हैं, लेकिन साथ ही यह सवाल भी खड़ा करती हैं कि—क्या भ्रष्टाचार अब भी सिस्टम की “आंतरिक बीमारी” बना हुआ है?…और क्या डर सिर्फ पकड़े जाने तक सीमित रह गया है?

सतर्कता की अपील, सूचना दें और नाम रहेगा गुप्त
सतर्कता अधिष्ठान ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत की मांग करता है, तो बिना डर शिकायत दर्ज कराएं। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। वहीं, उत्तरकाशी में PWD अमीन की गिरफ्तारी एक चेतावनी है—सरकारी पद अब ढाल नहीं, जवाबदेही की जिम्मेदारी है। लेकिन जब तक रिश्वतखोरी पर सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि सख्त सजा और सिस्टम में सुधार नहीं होगा, तब तक ऐसे नाम जुड़ते रहेंगे।

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