देहरादून: दून का सुकून अभी कायम है। यहां दिल्ली और मुंबई जैसी इतनी आपाधापी भी नहीं है कि शादी जैसे समारोह में शरीक होने और उसका एहसास करने के लिए फर्जी शादी का सहारा लिया जाए। फिर कुछ रस्में ऐसी होती हैं, जिनकी जगह आभासी दुनिया कतई नहीं ले सकती। हम जिंदा हैं, हमारे भीतर
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