देहरादून में बोरे में मिली लाश का खुलासा, पति निकला हत्यारा

देहरादून में बोरे में मिली लाश का खुलासा, पति निकला हत्यारा

देहरादून,  प्रेमनगर थाना क्षेत्र के माडूंवाला जंगल में बालासुंदरी मंदिर परिसर के पास 11 मार्च को प्लास्टिक के बोरे (कट्टे) में मिली अज्ञात महिला की लाश का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में दून पुलिस ने इस मामले की

देहरादून, 

प्रेमनगर थाना क्षेत्र के माडूंवाला जंगल में बालासुंदरी मंदिर परिसर के पास 11 मार्च को प्लास्टिक के बोरे (कट्टे) में मिली अज्ञात महिला की लाश का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में दून पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 8 जांच टीमों का गठन किया।
शुरुआती जांच में 2500 सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बावजूद कोई ठोस सुराग नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने आसपास की 30 से अधिक झुग्गी बस्तियों में सत्यापन अभियान चलाया और लगभग 5000 लोगों से पूछताछ की।
पति ने किया जुर्म स्वीकार
19 मार्च को जांच में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। संदिग्ध रंजीत शर्मा को हिरासत में लेकर पूछताछ में उसने अपनी पहली पत्नी रूपा की हत्या करना स्वीकार कर लिया। पुलिस के अनुसार, पारिवारिक विवाद हत्या का मुख्य कारण बना। रूपा अपने दूसरे पति को छोड़कर वापस रंजीत के पास आ गई थी और उस पर दूसरी पत्नी को छोड़ने का दबाव डाल रही थी।
5 मार्च की रात दोनों के बीच झगड़ा हुआ, जिसके बाद रंजीत ने गला दबाकर रूपा की हत्या कर दी हत्या के बाद आरोपी ने शव को चार दिनों तक कमरे में छिपाकर रखा और 8 मार्च को उसे प्लास्टिक कट्टे में डालकर शीतला माता मंदिर के पास जंगल में फेंक दिया।
पुलिस ने आरोपी रंजीत शर्मा, निवासी सुखासन, थाना सिमरी बखायारपुर जिला सहरसा, बिहार, वर्तमान निवासी भट्टोवाला, प्रेमनगर को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले का पर्दाफाश करने वाली पुलिस टीम को आईजी राजीव स्वरूप और एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल ने नकद पुरस्कार देने की घोषणा की।
पूछताछ में सामने आया पूरा मामला
रंजीत ने बताया कि वर्ष 2009 में उसका विवाह रूपा से हुआ था। चार वर्ष पूर्व रूपा किसी अन्य पुरुष के साथ भाग गई थी। इसके बाद रंजीत ने अपने गांव में रहने वाली सुशीला से पुनर्विवाह किया।
पिछले 12 वर्षों से रंजीत देहरादून में मजदूरी कर रहा था। उसकी दूसरी पत्नी सुशीला पिछले एक वर्ष से गांव में रहती थी।
रूपा एक साल पूर्व अपने बच्चे के साथ वापस आ गई और रंजीत के सम्पर्क में आने लगी। इसके दौरान वह रंजीत पर अपनी दूसरी पत्नी को छोड़ने का दबाव डाल रही थी।
5 मार्च की रात रूपा ने रंजीत का फोन छीन लिया और उससे दूसरी पत्नी से बात न करने के लिए दबाव बनाया। इसके कारण दोनों के बीच विवाद हुआ और रंजीत ने रूपा का गला दबाकर हत्या कर दी।
रंजीत ने शव को पहले कमरे में रजाई से ढककर छिपाया और 8 मार्च को अपनी दूसरी पत्नी के देहरादून आने पर 11 माह की बच्ची को उसकी देखभाल में छोड़कर शव को कट्टे में डालकर मांवाला जंगल में मंदिर के पास फेंक दिया।
रंजीत ने बताया कि रूपा हाल ही में बिहार से देहरादून आई थी और स्थानीय लोगों को उसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। यही कारण था कि वह आश्वस्त था कि पुलिस उसकी पहचान नहीं कर पाएगी।

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