पेड़ों की कटाई पर चेतावनी, 9 मार्च से ‘चिपको आंदोलन’ का ऐलान

पेड़ों की कटाई पर चेतावनी, 9 मार्च से ‘चिपको आंदोलन’ का ऐलान

यदि पेड़ों की कटाई नहीं रोकी गई तो 9 मार्च से करेंगे ‘चिपको आंदोलन’  देहरादून। राजधानी देहरादून में पर्यावरण संरक्षण को लेकर रविवार को ग्रीन दून के नेतृत्व में करीब 23 संगठनों के प्रतिनिधियों ने ‘वायदा निभाओ’ पदयात्रा निकाली। यह पदयात्रा दिलाराम चौक से सेंट्रियो

यदि पेड़ों की कटाई नहीं रोकी गई तो 9 मार्च से करेंगे ‘चिपको आंदोलन’ 

देहरादून

राजधानी देहरादून में पर्यावरण संरक्षण को लेकर रविवार को ग्रीन दून के नेतृत्व में करीब 23 संगठनों के प्रतिनिधियों ने ‘वायदा निभाओ’ पदयात्रा निकाली। यह पदयात्रा दिलाराम चौक से सेंट्रियो मॉल तक निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पिछले वर्ष न्यू कैंट रोड के चौड़ीकरण के नाम पर 250 पेड़ों को काटने का प्रस्ताव रखा गया था। जनदबाव के चलते सरकार ने यह प्रस्ताव वापस ले लिया था और स्वयं मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा की थी। उस समय स्थानीय पार्षद और अन्य जनप्रतिनिधियों ने इसका स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री को धन्यवाद ज्ञापित किया था तथा बड़े-बड़े होर्डिंग भी लगाए गए थे।

अब प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि दोबारा उसी क्षेत्र में 17 पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई है और आगे बड़ी संख्या में और पेड़ काटे जाने की आशंका है। इसी वादे की याद दिलाने और पेड़ों को बचाने के उद्देश्य से यह पदयात्रा आयोजित की गई।

आंदोलनकारियों ने कहा कि देहरादून में वर्ष दर वर्ष प्रदूषण बढ़ता जा रहा है और तापमान में भी लगातार वृद्धि हो रही है। मार्च की शुरुआत में ही अप्रैल जैसी गर्मी का एहसास हो रहा है। मसूरी मार्ग सहित कई नई सड़कों के चौड़ीकरण के नाम पर पहले ही हजारों पेड़ काटे जा चुके हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन पर गंभीर असर पड़ा है।

संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि पेड़ों की कटाई नहीं रोकी गई तो 9 मार्च से प्रतिदिन कम से कम पांच सदस्य कैंट रोड पर पेड़ों से चिपककर ‘चिपको आंदोलन’ करेंगे।

आज के प्रदर्शन में हिमांशु अरोरा, इरा चौहान, रवि चोपड़ा, अनूप नौटियाल, जया सिंह, जगमोहन मेंदीरत्ता, ऋतु चटर्जी, कमला पंत, इंद्रेश मैखुरी, मोहित डिमरी, जितेंद्र अंथवाल, अमर सिंह धुनता, लोकेश ओहरी, अजय शर्मा सहित कई अन्य लोग शामिल रहे।

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य विकास कार्यों का विरोध नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित विकास सुनिश्चित करना है।

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