वंदे मातरम् के 150 वर्ष—राष्ट्रीय स्मारक समारोह में एडीफाई वर्ल्ड स्कूल देहरादून की सहभागिता

वंदे मातरम् के 150 वर्ष—राष्ट्रीय स्मारक समारोह में एडीफाई वर्ल्ड स्कूल देहरादून की सहभागिता

एडीफाई वर्ल्ड स्कूल देहरादून ने “वंदे मातरम के 150 साल” पूर्ण होने पर कार्यक्रम का आयोजन किया। वंदे मातरम् के 150 वर्ष—राष्ट्रीय स्मारक समारोह में एडीफाई वर्ल्ड स्कूल देहरादून की सहभागिता देहरादून: 11 दिसंबर 2025 – भारत सरकार द्वारा शुरू की गई “वंदे मातरम के

एडीफाई वर्ल्ड स्कूल देहरादून ने “वंदे मातरम के 150 साल” पूर्ण होने पर कार्यक्रम का आयोजन किया।

वंदे मातरम् के 150 वर्ष—राष्ट्रीय स्मारक समारोह में एडीफाई वर्ल्ड स्कूल देहरादून की सहभागिता

देहरादून: 11 दिसंबर 2025 – भारत सरकार द्वारा शुरू की गई “वंदे मातरम के 150 साल” राष्ट्रीय स्मारक पहल के अंतर्गत, पूरे देश में वंदे मातरम् की भावना और उसके ऐतिहासिक महत्व का उत्सव मनाया जा रहा है। वंदे मातरम् मात्र एक गीत नहीं, बल्कि भारत की सामूहिक चेतना का प्रतीक तथा स्वतंत्रता संग्राम के वीर सेनानियों का उत्साहवर्धक नारा रहा है।

1 अक्टूबर को केंद्र सरकार द्वारा वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर देशव्यापी कार्यक्रमों की स्वीकृति दी गई, जिसका उद्देश्य नागरिकों—विशेषत: युवाओं और विद्यार्थियों—को इस गीत की मूल, क्रांतिकारी और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत भावना से जोड़ना है।
इस राष्ट्रीय उत्सव का हिस्सा बनते हुए एडीफाई वर्ल्ड स्कूल देहरादून ने भी अपने परिसर में विशेष कार्यक्रमों, वाद-विवाद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और जागरूकता गतिविधियों का आयोजन करने का निर्णय लिया है, ताकि छात्र-छात्राओं के मन में इस कालातीत प्रेरणा को स्थायी रूप से अंकित किया जा सके। विद्यालय का उद्देश्य है कि वंदे मातरम् की गौरवमयी विरासत अगली पीढ़ी के हृदयों में सुरक्षित, सशक्त और जीवंत बनी रहे।

विद्यालय प्रशासन, शिक्षक-मंडल एवं छात्रों का उत्साह इस राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एडीफाई वर्ल्ड स्कूल भारत की इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और प्रचार के लिए पूर्णत: प्रतिबद्ध है।

अतिरिक्त गतिविधियों के अंतर्गत उत्तराखंड उच्च न्यायालय बार काउंसिल के उपाध्यक्ष, अधिवक्ता पूरण सिंह रावत ने एडिफ़ाई वर्ल्ड स्कूल के विद्यार्थियों के लिए भारतीय संविधान पर एक ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सत्र आयोजित किया। अपने संबोधन में उन्होंने संविधान की उत्पत्ति, इसकी महत्वपूर्ण विशेषताओं तथा नागरिकों के मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।

सत्र के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि संविधान हमारे दैनिक जीवन और लोकतांत्रिक व्यवस्था में कितना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे, जिनका अधिवक्ता रावत ने सरल और प्रभावी तरीके से उत्तर दिया। यह संवादात्मक प्रश्न-उत्तर सत्र विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभदायक एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ।

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