देहरादून। उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में शुमार वन अनुसंधान संस्थान (FRI) करीब चार महीने के लंबे इंतजार के बाद सोमवार से पर्यटकों के लिए दोबारा खोल दिया गया है। जनवरी के अंत में परिसर के मरम्मत कार्य और सुरक्षा व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के
देहरादून।
उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में शुमार वन अनुसंधान संस्थान (FRI) करीब चार महीने के लंबे इंतजार के बाद सोमवार से पर्यटकों के लिए दोबारा खोल दिया गया है। जनवरी के अंत में परिसर के मरम्मत कार्य और सुरक्षा व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए इसे अस्थायी रूप से बंद किया गया था। अब सख्त नियमों और नई सुरक्षा गाइडलाइंस के साथ सैलानियों को प्रवेश दिया जाएगा।
टिकट दरों में भारी बढ़ोतरी, जेब पर बढ़ेगा बोझ
FRI प्रशासन ने 25 मई 2026 से लागू होने वाली नई शुल्क दरों की घोषणा कर दी है। इस बार प्रवेश शुल्क से लेकर वाहनों की एंट्री और संग्रहालय (Museum) की टिकट दरों में बड़ा इजाफा किया गया है।
1. मुख्य परिसर प्रवेश शुल्क (Entry Fee):
भारतीय पर्यटक: ₹100 प्रति व्यक्ति (पहले लगभग ₹20 था)
विदेशी नागरिक: ₹1,000 प्रति व्यक्ति (पहले लगभग ₹150 था)
बिना अनुमति प्रवेश पर जुर्माना: ₹1,000 प्रति व्यक्ति
2. वाहनों का प्रवेश शुल्क (Vehicle Charges):
दोपहिया वाहन (Two Wheeler): ₹50
ऑटो रिक्शा (Auto Rickshaw): ₹100
निजी कार और टैक्सी: ₹150
बस और ट्रक: ₹300
3. प्रसिद्ध एफआरआई संग्रहालय शुल्क (Museum Fee):
भारतीय वयस्क पर्यटक: ₹150
विदेशी नागरिक: ₹1,500
स्कूली बच्चे (ग्रुप में): ₹30 प्रति बच्चा
कॉलेज के छात्र: ₹50 प्रति छात्र
गौरवशाली है FRI का इतिहास
देश के सबसे प्रतिष्ठित वानिकी अनुसंधान संस्थानों में शामिल FRI का इतिहास बेहद समृद्ध है:
स्थापना: वर्ष 1878 में ‘फॉरेस्ट स्कूल ऑफ देहरादून’ के रूप में इसकी शुरुआत हुई थी।
बदलाव: बाद में इसे ‘इम्पीरियल फॉरेस्ट स्कूल’ और फिर ‘इम्पीरियल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट’ नाम दिया गया।
डीम्ड यूनिवर्सिटी: स्वतंत्रता के बाद इसका नाम ‘वन अनुसंधान संस्थान’ (FRI) हुआ और वर्ष 1991 में इसे डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला।
क्यों खास है FRI परिसर? करीब 500 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में फैला यह परिसर अपनी अद्भुत हरियाली, दुर्लभ पेड़-पौधों की प्रजातियों और छह बड़े वानिकी संग्रहालयों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। ग्रीक-रोमन शैली और लाल ईंटों से बने इसके मुख्य भवन को प्रसिद्ध ब्रिटिश वास्तुकार सी.जी. ब्लामफील्ड द्वारा डिजाइन किया गया था, जिसकी भव्य वास्तुकला को देखने हर साल लाखों सैलानी देहरादून पहुंचते हैं।









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