हरिद्वार जेल के वरिष्ठ अधीक्षक को लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से धमकी, FIR दर्ज

हरिद्वार जेल के वरिष्ठ अधीक्षक को लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से धमकी, FIR दर्ज

हरिद्वार: हरिद्वार जिला कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक को कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि वरिष्ठ अधीक्षक को फोन कॉल के साथ-साथ व्हाट्सऐप मैसेज के जरिए धमकाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल प्रशासन ने पुलिस को शिकायत दी, जिसके

हरिद्वार: हरिद्वार जिला कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक को कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि वरिष्ठ अधीक्षक को फोन कॉल के साथ-साथ व्हाट्सऐप मैसेज के जरिए धमकाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल प्रशासन ने पुलिस को शिकायत दी, जिसके बाद सिडकुल थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, जेल में बंद एक महिला बंदी के पति हिमांशु चड्ढा पर वरिष्ठ अधीक्षक को धमकी देने का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि हिमांशु ने कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम का इस्तेमाल करते हुए फोन और व्हाट्सऐप के माध्यम से वरिष्ठ अधीक्षक को डराने-धमकाने का प्रयास किया।

वरिष्ठ अधीक्षक ने SSP को भेजा पत्र

घटना के बाद हरिद्वार जिला कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को पत्र भेजकर पूरे मामले की जानकारी दी। पत्र में आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया गया। शिकायत के आधार पर सिडकुल थाना पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

कॉल और व्हाट्सऐप मैसेज की जांच

पुलिस अब मामले की जांच में जुटी है। जांच के दौरान धमकी देने के लिए इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और व्हाट्सऐप मैसेज से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा सकती है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि धमकी वास्तव में आरोपी ने ही दी थी या किसी अन्य व्यक्ति ने उसके नाम अथवा मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कनेक्शन की भी होगी पड़ताल

FIR में हिमांशु चड्ढा को आरोपी बनाया गया है। वह हरिद्वार जिला कारागार में बंद एक महिला बंदी का पति बताया जा रहा है। फिलहाल पुलिस धमकी के पीछे की वजह, आरोपी की भूमिका और कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम के इस्तेमाल की सच्चाई की जांच कर रही है।

पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपी का किसी संगठित गिरोह से वास्तविक संबंध है या धमकी देने के लिए महज गैंग के नाम का इस्तेमाल किया गया।

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