मशहूर उद्योगपति मुकेश अंबानी ने किए बदरी-केदार के दर्शन, मंदिर समिति (BKTC) को दान किए ₹10 करोड़

मशहूर उद्योगपति मुकेश अंबानी ने किए बदरी-केदार के दर्शन, मंदिर समिति (BKTC) को दान किए ₹10 करोड़

चमोली/रुद्रप्रयाग: रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और देश के दिग्गज उद्योगपति मुकेश अंबानी सोमवार सुबह अपनी आध्यात्मिक यात्रा पर उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध धामों में पहुंचे। उन्होंने भगवान बदरी विशाल और बाबा केदारनाथ के दर पर मत्था टेककर देश की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की। इस

चमोली/रुद्रप्रयाग: रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और देश के दिग्गज उद्योगपति मुकेश अंबानी सोमवार सुबह अपनी आध्यात्मिक यात्रा पर उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध धामों में पहुंचे। उन्होंने भगवान बदरी विशाल और बाबा केदारनाथ के दर पर मत्था टेककर देश की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की। इस पावन अवसर पर मुकेश अंबानी ने ‘श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति’ (BKTC) को 10 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि दान स्वरूप भेंट की।

सुबह 9:15 बजे पहुंचे बदरीनाथ धाम, हुआ भव्य स्वागत

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह राणा ने बताया कि मुकेश अंबानी सुबह करीब 9:15 बजे अपने परिवार के कुछ सदस्यों और करीबी सहयोगियों के साथ बदरीनाथ धाम पहुंचे थे। धाम पहुंचने पर मंदिर समिति के पदाधिकारियों और तीर्थ पुरोहितों ने उनका पारंपरिक और भव्य स्वागत किया।

  • विशेष पूजा-अर्चना: मुकेश अंबानी ने बदरीनाथ मंदिर के गर्भगृह में भगवान बदरी विशाल की विशेष पूजा-अर्चना की और मनौतियां मांगी।

  • दान का उद्देश्य: उनके द्वारा दी गई 10 करोड़ रुपये की दान राशि का उपयोग दोनों धामों में आने वाले तीर्थयात्रियों की सुविधाओं को बढ़ाने और मंदिर समिति की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए किया जाएगा।

बदरीनाथ के बाद बाबा केदार के दर पर लगाई हाजिरी

बदरीनाथ धाम में दर्शन और पूजा-अर्चना पूरी करने के बाद मुकेश अंबानी हेलीकॉप्टर से सीधे केदारनाथ धाम के लिए रवाना हुए। केदारनाथ पहुंचने पर उन्होंने बाबा केदार के दर्शन किए और विशेष पूजा में भाग लिया। उन्होंने केदारपुरी में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों की भी सराहना की।

बदरी-केदार से है पुराना और अटूट नाता

धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण योगदान: मुकेश अंबानी की बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में गहरी आस्था है। वह हर साल कपाट खुलने के बाद दोनों धामों के दर्शन के लिए उत्तराखंड जरूर आते हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी उन्होंने मंदिर समिति को उदारतापूर्वक आर्थिक सहयोग दिया है, जो देवभूमि के विकास और यात्रा व्यवस्थाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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