हर्रावाला में RTO इंस्पेक्टर पर रिश्वतखोरी के आरोप, ट्रांसपोर्ट कारोबारियों ने दुकान में बंद कर किया हंगामा

हर्रावाला में RTO इंस्पेक्टर पर रिश्वतखोरी के आरोप, ट्रांसपोर्ट कारोबारियों ने दुकान में बंद कर किया हंगामा

देहरादून: राजधानी देहरादून के हर्रावाला क्षेत्र में परिवहन विभाग एक बार फिर विवादों में घिर गया है। सोमवार को ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और स्थानीय लोगों ने एक आरटीओ इंस्पेक्टर पर कथित मासिक वसूली के आरोप लगाते हुए उसे दुकान के अंदर बंद कर दिया। करीब दो

देहरादून:

राजधानी देहरादून के हर्रावाला क्षेत्र में परिवहन विभाग एक बार फिर विवादों में घिर गया है। सोमवार को ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और स्थानीय लोगों ने एक आरटीओ इंस्पेक्टर पर कथित मासिक वसूली के आरोप लगाते हुए उसे दुकान के अंदर बंद कर दिया। करीब दो घंटे तक चले हंगामे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

आरोप है कि आरटीओ सब इंस्पेक्टर शशिकांत तेंगोवाल विभिन्न श्रेणी के वाहनों से तय रकम के हिसाब से महीना वसूली करता था। कारोबारियों के मुताबिक छोटी गाड़ियों से दो हजार रुपये, छह टायर वाहनों से आठ हजार रुपये, दस टायर वाहनों से दस हजार और बारह टायर वाहनों से बारह हजार रुपये प्रतिमाह लिए जाते थे।

सोमवार को भी इंस्पेक्टर कथित तौर पर पैसे लेने पहुंचा था, तभी ट्रांसपोर्ट कारोबारियों ने उसे पकड़ लिया और दुकान के अंदर बैठा दिया। घटना के दौरान मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और लोगों ने परिवहन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

वायरल वीडियो में अधिकारी खुद को बचाने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है। कभी वह कहता है कि वह केवल रास्ते में रुका था, तो कभी दावा करता है कि उसे जबरन बैठाकर मिठाई खिलाई जा रही थी। वहीं दुकान के अंदर टेबल पर रखी नोटों की गड्डी ने पूरे मामले को और चर्चाओं में ला दिया।

मामले के दौरान एक पोस्टर भी चर्चा का केंद्र बना, जिस पर लिखा था — “मैं देहरादून RTO हूं, बिना पैसे गाड़ियां नहीं चलने दूंगा।” यह पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के साथ तेजी से फैल गया।

घटना के बाद परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है। परिवहन सचिव ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। आरटीओ प्रशासन संदीप सैनी ने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार संबंधित इंस्पेक्टर को फिलहाल प्रवर्तन कार्यों से हटाकर आरटीओ कार्यालय से अटैच कर दिया गया है, जबकि निलंबन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। घटना के बाद ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और आम लोगों में विभाग की कार्यशैली को लेकर नाराजगी देखी जा रही है।

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