उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारियों के लिए संपत्ति खरीदना-बेचना हुआ सख्त, सरकार से लेन-देन करने वालों के साथ सौदे पर अनुमति जरूरी

उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारियों के लिए संपत्ति खरीदना-बेचना हुआ सख्त, सरकार से लेन-देन करने वालों के साथ सौदे पर अनुमति जरूरी

कर्मचारी आचरण नियमावली में संशोधन, संपत्ति का विवरण देना होगा अनिवार्य; दो माह के मूल वेतन से अधिक की चल संपत्ति खरीदने-बेचने पर एक माह के भीतर देनी होगी सूचना देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारियों के लिए संपत्ति की खरीद-बिक्री और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े नियमों को सख्त किया गया है। राज्य सरकार ने कर्मचारी

कर्मचारी आचरण नियमावली में संशोधन, संपत्ति का विवरण देना होगा अनिवार्य; दो माह के मूल वेतन से अधिक की चल संपत्ति खरीदने-बेचने पर एक माह के भीतर देनी होगी सूचना

देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारियों के लिए संपत्ति की खरीद-बिक्री और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े नियमों को सख्त किया गया है। राज्य सरकार ने कर्मचारी आचरण नियमावली में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारी सरकार के साथ लेन-देन करने वाले किसी व्यक्ति, फर्म, कंपनी या संस्थान से अचल संपत्ति की खरीद, बिक्री अथवा अदला-बदली निर्धारित अनुमति प्राप्त किए बिना नहीं कर सकेंगे। इस संबंध में कार्मिक विभाग ने संशोधित नियमावली की अधिसूचना जारी कर दी है।

संशोधित प्रावधानों का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के संपत्ति संबंधी लेन-देन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और उनके व्यावसायिक हितों से जुड़े संभावित टकराव को रोकना है।

सरकार से लेन-देन करने वालों के साथ संपत्ति का सौदा करने पर अनुमति जरूरी

संशोधित नियमों के अनुसार, कोई भी सरकारी कर्मचारी ऐसे व्यक्ति, फर्म, कंपनी या संस्थान से अचल संपत्ति की खरीद, बिक्री या अदला-बदली नहीं कर सकेगा, जिसका सरकार के साथ किसी प्रकार का लेन-देन हो। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत पूर्व अनुमति प्राप्त करना आवश्यक होगा।

कर्मचारियों को अपने नाम या परिवार के किसी सदस्य के नाम पर जमीन अथवा अन्य अचल संपत्ति खरीदने, बेचने या उपहार में लेने के मामले में भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।

संपत्ति का विवरण देना होगा अनिवार्य

राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति का विवरण प्रस्तुत करने संबंधी प्रावधानों को भी स्पष्ट किया है। इसके तहत समूह-क, ख और ग के कर्मचारियों को प्रत्येक वर्ष अपनी संपत्ति का विवरण नियुक्ति प्राधिकारी को देना होगा। वहीं, समूह-घ के कर्मचारियों के लिए संपत्ति का विवरण प्रस्तुत करने की अवधि पांच वर्ष निर्धारित की गई है।

इस व्यवस्था के माध्यम से कर्मचारियों की संपत्ति से संबंधित जानकारी का नियमित रिकॉर्ड रखने और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

दो माह के मूल वेतन से अधिक की चल संपत्ति पर देनी होगी सूचना

संशोधित नियमावली में चल संपत्ति के लेन-देन को लेकर भी प्रावधान किया गया है। इसके अनुसार, यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपने दो माह के मूल वेतन से अधिक कीमत की चल संपत्ति खरीदता या बेचता है, तो उसे एक माह के भीतर इसकी सूचना अपने नियुक्ति प्राधिकारी को देनी होगी।

इस प्रावधान के दायरे में निर्धारित सीमा से अधिक मूल्य की चल संपत्ति के लेन-देन की जानकारी देना आवश्यक होगा, जिससे ऐसे मामलों की निगरानी और रिकॉर्ड संधारण किया जा सके।

तैनाती वाले जिले में बीमा एजेंट के रूप में काम करने पर प्रतिबंध

सरकार ने कर्मचारियों के परिवार से जुड़े व्यावसायिक हितों पर भी प्रावधान स्पष्ट किए हैं। इसके तहत सरकारी कर्मचारियों की पत्नी या उन पर आश्रित रिश्तेदारों के कर्मचारी की तैनाती वाले जिले में बीमा एजेंट के रूप में काम करने पर प्रतिबंध लगाया गया है।

कार्मिक विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के बाद संशोधित नियमावली के प्रावधानों के अनुसार कर्मचारियों को संपत्ति के लेन-देन और संबंधित गतिविधियों में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।

Action Today24x7
ADMINISTRATOR
PROFILE

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

Latest Posts