देहरादून: उत्तराखंड में चिलचिलाती गर्मी के बीच मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के 11 जिलों के लिए अगले 24 घंटे का ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 1 जून दोपहर से
देहरादून:
उत्तराखंड में चिलचिलाती गर्मी के बीच मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के 11 जिलों के लिए अगले 24 घंटे का ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 1 जून दोपहर से लेकर 2 जून दोपहर तक प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश, अंधड़, बिजली चमकने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने की आशंका है।
इन 11 जिलों में मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, जिन जिलों में मौसम का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
गढ़वाल मंडल: देहरादून, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग।
कुमाऊं मंडल: अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत, नैनीताल और पिथौरागढ़।
प्रमुख शहरों और चारधाम रूट पर विशेष नजर
विभाग ने राज्य के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों, शहरों और यात्रा मार्गों पर तेज बारिश के साथ गरज-चमक और आंधी चलने की संभावना जताई है। इन क्षेत्रों पर प्रशासन की विशेष नजर है:
| क्षेत्र/तहसील | चारधाम और पर्वतीय क्षेत्र | कुमाऊं के क्षेत्र |
| डोईवाला, मसूरी, विकासनगर, चकराता, कोटद्वार | गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ | हल्द्वानी, रानीखेत, मुनस्यारी |
बारिश की तीव्रता: मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि कुछ मैदानी और पर्वतीय इलाकों में कम समय में तेज और मूसलाधार बारिश (High Intensity Rain) भी दर्ज की जा सकती है।
भूस्खलन का खतरा; स्थानीय लोगों और यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह
पर्वतीय क्षेत्रों में अचानक होने वाली तेज बारिश के कारण भूस्खलन (Landslide) और मुख्य मार्ग अवरुद्ध होने की आशंका बनी रहती है। इसे देखते हुए मौसम विभाग और प्रशासन ने गाइडलाइन जारी की है:
अनावश्यक यात्रा से बचें: तीर्थयात्रियों और पर्यटकों से अपील की गई है कि वे मौसम साफ होने तक संवेदनशील रास्तों पर सफर करने से बचें।
सुरक्षित स्थानों पर लें शरण: बिजली कड़कने के दौरान खुले मैदानों, जलस्रोतों या बड़े पेड़ों के नीचे बिल्कुल खड़े न हों।
प्रशासन अलर्ट मोड पर: राज्य आपदा प्रबंधन विभाग (SDRF) और जिला प्रशासनों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके।










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